Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.28.30: काल से प्रेरित होकर दुष्ट मनुष्य अहंकारपूर्वक यह विचार करने लगता है कि मैं यह करूँगा, तत्पश्चात् असंतुष्ट होकर वह जो भी पाप कर्म करना चाहता है, करने लगता है ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.28.30 
अहमेतत् करोमीति मन्यते कालनोदित:।
यद् यदिष्टमसंतोषाद् दुरात्मा पापमाचरेत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
काल से प्रेरित होकर दुष्ट मनुष्य अहंकारपूर्वक यह विचार करने लगता है कि मैं यह करूँगा, तत्पश्चात् असंतुष्ट होकर वह जो भी पाप कर्म करना चाहता है, करने लगता है ॥30॥
 
Inspired by time, a wicked man starts arrogantly thinking that he will do this. Thereafter, due to dissatisfaction, he starts doing whatever sinful act he desires. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)