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mahabharat 12.28.26-27h: इस सेतु को कोई पार करता हुआ नहीं देखा गया है अथवा पहले कभी किसी ने इसे पार किया हो, ऐसा नहीं देखा गया है। कुछ मनुष्य जो भगवान् के वश में नहीं रह पाते (तप आदि प्रबल प्रयासों से) वे पूर्वोक्त सेतु को पार करते हुए देखे जाते हैं॥26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  12.28.26-27h 
दृश्यते नाप्यतिक्रामन्न निष्क्रान्तोऽथवा पुन:॥ २६॥
दृश्यते चाप्यतिक्रामन्ननिग्राह्योऽथवा पुन:।
 
 
अनुवाद
इस सेतु को कोई पार करता हुआ नहीं देखा गया है अथवा पहले कभी किसी ने इसे पार किया हो, ऐसा नहीं देखा गया है। कुछ मनुष्य जो भगवान् के वश में नहीं रह पाते (तप आदि प्रबल प्रयासों से) वे पूर्वोक्त सेतु को पार करते हुए देखे जाते हैं॥26 1/2॥
 
No one is seen to have crossed this bridge or it has not been seen that anyone has crossed it before. Some men who are not able to remain under the control of God (by strong efforts like penance etc.) are seen to have crossed the aforementioned bridge.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)