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mahabharat 12.28.24: जो लोग दरिद्र हैं और संतान नहीं चाहते, उनके बहुत से पुत्र होते हैं, और जो धनवान हैं, उनमें से कितनों के एक भी पुत्र नहीं होता। विधाता की गति बड़ी विचित्र है॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.28.24 
सन्ति पुत्रा: सुबहवो दरिद्राणामनिच्छताम्।
नास्ति पुत्र: समृद्धानां विचित्रं विधिचेष्टितम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो लोग दरिद्र हैं और संतान नहीं चाहते, उनके बहुत से पुत्र होते हैं, और जो धनवान हैं, उनमें से कितनों के एक भी पुत्र नहीं होता। विधाता की गति बड़ी विचित्र है॥24॥
 
Those who are poor and do not wish to have children, end up having many sons, while those who are rich, some of them do not even have a single son. The ways of the Creator are very strange.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)