श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.28.22 
वैद्याश्चाप्यातुरा: सन्ति बलवन्तश्च दुर्बला:।
श्रीमन्तश्चापरे षण्ढा विचित्र: कालपर्यय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कभी-कभी वैद्य भी रोगी हो जाता है, बलवान भी दुर्बल हो जाता है और धनवान भी असहाय हो जाता है। समय का यह उलटफेर बड़ा विचित्र है ॥22॥
 
Sometimes even a doctor becomes sick, a strong person becomes weak and a rich person also becomes helpless. This vicissitudes of time are very strange. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)