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mahabharat 12.279.30: हे प्रभु! निश्चय ही मेरे तप का कुछ अंश अभी भी शेष है, अतः मैं उस कर्म का फल जानना चाहता हूँ ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.279.30 
नूनं तु तस्य तपस: सावशेषमिहास्ति वै।
यदहं प्रष्टुमिच्छामि भगवन् कर्मण: फलम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! निश्चय ही मेरे तप का कुछ अंश अभी भी शेष है, अतः मैं उस कर्म का फल जानना चाहता हूँ ॥30॥
 
O Lord! Surely some part of my penance still remains, so I wish to inquire about the result of that action. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)