Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.279.28: जब महाहृदयी, महाहृदयी देवताओं के राजा इन्द्र युद्ध करने की इच्छा से मेरे पास आये, तब मैंने सबके स्वामी श्री नारायण हरि को देखा, जो उनकी सहायता के लिए उनके साथ आये थे।   |   mahabharat अध्याय 12.279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.279.28 
युयुत्सुना महेन्द्रेण पुंसा सार्धं महात्मना।
ततो मे भगवान् दृष्टो हरिर्नारायण: प्रभु:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जब महाहृदयी, महाहृदयी देवताओं के राजा इन्द्र युद्ध करने की इच्छा से मेरे पास आये, तब मैंने सबके स्वामी श्री नारायण हरि को देखा, जो उनकी सहायता के लिए उनके साथ आये थे।
 
When the great-hearted, great-hearted king of the gods Indra came to me with the desire to fight a war, I saw the Lord of all, Shri Narayan Hari, who had come with him to help him. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)