Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.279.27: हे प्रभु! इस प्रकार तप के बल से जो ऐश्वर्य मैंने प्राप्त किया था, वह मेरे ही कर्मों से नष्ट हो गया। फिर भी मैं धैर्यवान हूँ और इसके लिए शोक नहीं करता॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 12.279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु! इस प्रकार तप के बल से जो ऐश्वर्य मैंने प्राप्त किया था, वह मेरे ही कर्मों से नष्ट हो गया। फिर भी मैं धैर्यवान हूँ और इसके लिए शोक नहीं करता॥ 27॥
O Lord! In this way, the prosperity that I had acquired through the power of penance was destroyed by my own actions. However, I am patient and do not grieve for it.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥