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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.279.24 
वृत्र उवाच
प्रत्यक्षमेतद् भवतस्तथान्येषां मनीषिणाम्।
मया यज्जयलुब्धेन पुरा तप्तं महत् तप:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वृत्रासुर बोला - हे ब्रह्मन्! आपने तथा अन्य बुद्धिमान पुरुषों ने स्पष्ट रूप से देख लिया है कि मैंने पहले विजय के लोभ से घोर तप किया था।
 
Vritraasura said - O Brahman! You and other wise men have seen clearly that I had earlier performed great penance out of greed for victory.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)