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mahabharat 12.279.20: इस प्रकार मैंने सभी जीवों को जन्म-मरण के चक्र में फँसा हुआ देखा है। शास्त्रों में एक सिद्धांत है कि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 12.279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 279: ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय तथा उस विषयमें वृत्र-शुक्र-संवादका आरम्भ  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.279.20 
एवं संसरमाणानि जीवान्यहमदृष्टवान्।
यथा कर्म तथा लाभ इति शास्त्रनिदर्शनम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने सभी जीवों को जन्म-मरण के चक्र में फँसा हुआ देखा है। शास्त्रों में एक सिद्धांत है कि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है।
 
In this way I have seen all living beings caught in the cycle of birth and death. There is a principle in the scriptures that one gets the result as per one's deeds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)