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mahabharat 12.278.9: जब रसोईघर से धुआँ निकलना बन्द हो जाए, अनाज और मसाले कूटने वाला मूसल एक ओर रख दिया जाए, चूल्हे की आग ठंडी हो जाए, घर के लोग भोजन कर चुके हों और रसोईघर में बर्तनों और परोसे गए थालों का इधर-उधर हिलना बन्द हो जाए, तब संन्यासी मुनि को भिक्षा प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.278: हारीत मुनिके द्वारा प्रतिपादित संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 278: हारीत मुनिके द्वारा प्रतिपादित संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.278.9 
विधूमे न्यस्तमुसले व्यङ्गारे भुक्तवज्जने।
अतीतपात्रसंचारे भिक्षां लिप्सेत वै मुनि:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब रसोईघर से धुआँ निकलना बन्द हो जाए, अनाज और मसाले कूटने वाला मूसल एक ओर रख दिया जाए, चूल्हे की आग ठंडी हो जाए, घर के लोग भोजन कर चुके हों और रसोईघर में बर्तनों और परोसे गए थालों का इधर-उधर हिलना बन्द हो जाए, तब संन्यासी मुनि को भिक्षा प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए॥9॥
 
When the smoke stops emanating from the kitchen, the pestle used for pounding grains and spices is put aside, the fire on the stove goes cold, the people in the house have finished their meal and the movement of utensils and the plates served in the kitchen stop being carried here and there, then the Sanyasi Muni should try to obtain alms.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)