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mahabharat 12.278.8: मोक्ष चाहने वाले व्यक्ति को चाहिए कि यदि कोई उस पर धूल या कीचड़ फेंके, तो उससे अपनी रक्षा करे। बदले में वैसा न करे और कोई अप्रिय शब्द न कहे। उसे सदैव नम्रता से व्यवहार करना चाहिए। किसी के प्रति कठोर व्यवहार नहीं करना चाहिए। उसे निश्चिंत रहना चाहिए और अतिशयोक्ति नहीं करनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.278: हारीत मुनिके द्वारा प्रतिपादित संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 278: हारीत मुनिके द्वारा प्रतिपादित संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.278.8 
अवकीर्ण: सुगुप्तश्च न वाचा ह्यप्रियं वदेत्।
मृदु: स्यादप्रतिक्रूरो विस्रब्ध: स्यादकत्थन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मोक्ष चाहने वाले व्यक्ति को चाहिए कि यदि कोई उस पर धूल या कीचड़ फेंके, तो उससे अपनी रक्षा करे। बदले में वैसा न करे और कोई अप्रिय शब्द न कहे। उसे सदैव नम्रता से व्यवहार करना चाहिए। किसी के प्रति कठोर व्यवहार नहीं करना चाहिए। उसे निश्चिंत रहना चाहिए और अतिशयोक्ति नहीं करनी चाहिए।
 
If someone throws dust or mud on him, a person seeking liberation should only defend himself from that person. He should not do the same in return and should not utter any unpleasant words. He should always behave gently. He should not be harsh towards anyone. He should remain carefree and should not exaggerate.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)