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mahabharat 12.278.6: यदि कोई तुम्हारे प्रति रूखा व्यवहार करे, तुम्हारी निन्दा करे या कटु वचन कहे, तो उन वचनों को चुपचाप सहन करो। किसी के प्रति अहंकार या अभिमान मत दिखाओ। यदि कोई क्रोधित भी हो, तो भी उससे केवल मधुर वचन बोलो। यदि कोई उसे गाली भी दे, तो भी उसके प्रति केवल हितकर वचन बोलो।   |   mahabharat अध्याय 12.278: हारीत मुनिके द्वारा प्रतिपादित संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 278: हारीत मुनिके द्वारा प्रतिपादित संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.278.6 
अतिवादांस्तितिक्षेत नाभिमन्येत कंचन।
क्रोध्यमान: प्रियं ब्रूयादाक्रुष्ट: कुशलं वदेत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई तुम्हारे प्रति रूखा व्यवहार करे, तुम्हारी निन्दा करे या कटु वचन कहे, तो उन वचनों को चुपचाप सहन करो। किसी के प्रति अहंकार या अभिमान मत दिखाओ। यदि कोई क्रोधित भी हो, तो भी उससे केवल मधुर वचन बोलो। यदि कोई उसे गाली भी दे, तो भी उसके प्रति केवल हितकर वचन बोलो।
 
If someone speaks rudely towards you, criticizes you or speaks harsh words, then tolerate those words silently. Do not show arrogance or pride towards anyone. Even if someone is angry, speak only sweet words to him. Even if someone abuses him, speak only beneficial words towards him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)