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mahabharat 12.278.22: जो मनुष्य सबको अभय देकर घर से निकल जाता है, वह तेजोमय लोकों को प्राप्त होता है और परमात्मपद को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.278: हारीत मुनिके द्वारा प्रतिपादित संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 278: हारीत मुनिके द्वारा प्रतिपादित संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.278.22 
अभयं सर्वभूतेभ्यो दत्त्वा य: प्रव्रजेद् गृहात्।
लोकास्तेजोमयास्तस्य तथाऽऽनन्त्याय कल्पते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सबको अभय देकर घर से निकल जाता है, वह तेजोमय लोकों को प्राप्त होता है और परमात्मपद को प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है ॥22॥
 
The man who leaves his house after giving protection to everyone, attains the radiant worlds and becomes capable of achieving the eternal state of the Supreme Being. ॥22॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि हारीतगीतायां अष्टसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें हारीतगीताविषयक दो सौ अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुछ २३ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)