Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.278.1: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! जो मनुष्य किस प्रकार के स्वभाव, किस प्रकार के आचरण, किस प्रकार के ज्ञान और किस प्रकार के कर्मों से युक्त होकर सम्पूर्ण कर्मों को करने में तत्पर रहता है, वह प्रकृति से परे परमपिता परमेश्वर के सनातन धाम को किस प्रकार प्राप्त कर सकता है?॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.278: हारीत मुनिके द्वारा प्रतिपादित संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! जो मनुष्य किस प्रकार के स्वभाव, किस प्रकार के आचरण, किस प्रकार के ज्ञान और किस प्रकार के कर्मों से युक्त होकर सम्पूर्ण कर्मों को करने में तत्पर रहता है, वह प्रकृति से परे परमपिता परमेश्वर के सनातन धाम को किस प्रकार प्राप्त कर सकता है?॥1॥
Yudhishthir asked – Grandfather! How can a man with what kind of nature, what kind of conduct, what kind of knowledge and what kind of activities, who is ready to perform all the activities, attain the eternal abode of Supreme God which is beyond nature? 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥