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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 277: शरीर और संसारकी अनित्यता तथा आत्मकल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषके कर्तव्यका निर्देश—पिता-पुत्रका संवाद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.277.9 
पुत्र उवाच
मृत्युनाभ्याहतो लोको जरया परिवारित:।
अहोरात्रा: पतन्तीमे तच्च कस्मान्न बुद्धॺसे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
बेटे ने कहा, "पिताजी! देखिए, सारी दुनिया पर मौत का साया मंडरा रहा है। बुढ़ापा छा गया है। ये दिन-रात हम पर टूट रहे हैं। आप यह बात क्यों नहीं समझ रहे?"
 
The son said, "Father! Look, death is beating the whole world. Old age has surrounded it. These days and nights are falling upon us. Why are you not understanding this?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)