Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.277.8: पिता ने कहा, "बेटा! तुम मुझे क्यों डरा रहे हो? इस संसार को कैसे दण्ड दिया जाता है या इसे किसने घेर रखा है? और वे कौन सी अचूक बातें हैं जो यहाँ हम पर पड़ती हैं?" | mahabharat अध्याय 12.277: शरीर और संसारकी अनित्यता तथा आत्मकल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषके कर्तव्यका निर्देश—पिता-पुत्रका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पिता ने कहा, "बेटा! तुम मुझे क्यों डरा रहे हो? इस संसार को कैसे दण्ड दिया जाता है या इसे किसने घेर रखा है? और वे कौन सी अचूक बातें हैं जो यहाँ हम पर पड़ती हैं?"
The father said, "Son! Why are you trying to frighten me? How is this world punished or who has surrounded it? And what are the infallible things that fall upon us here?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥