Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.277.7: पुत्र ने पूछा - पिताजी ! यह संसार किसी के द्वारा अत्यन्त दण्डित और सब ओर से घिरा हुआ प्रतीत होता है। यहाँ ये अमोघ वस्तुएँ हम पर गिरती रहती हैं। ऐसी दशा में आप किस प्रकार धैर्यवान पुरुष की भाँति बातें कर रहे हैं?॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.277: शरीर और संसारकी अनित्यता तथा आत्मकल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषके कर्तव्यका निर्देश—पिता-पुत्रका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्र ने पूछा - पिताजी ! यह संसार किसी के द्वारा अत्यन्त दण्डित और सब ओर से घिरा हुआ प्रतीत होता है। यहाँ ये अमोघ वस्तुएँ हम पर गिरती रहती हैं। ऐसी दशा में आप किस प्रकार धैर्यवान पुरुष की भाँति बातें कर रहे हैं?॥7॥
The son asked - Father! This world seems to be very much punished by someone and surrounded from all sides. Here these infallible things keep falling upon us. In such a condition how are you talking like a patient man?॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥