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mahabharat 12.277.38: ब्रह्माण्डदेव (पिता) ! जब एक दिन मरना ही है, तो यह सारा धन, वैभव, मित्र, सम्बन्धी, स्त्री-पुत्रादि सब किस काम के? अपने हृदय-गुहा में निवास करने वाली आत्मा की खोज करो। जरा सोचो, आज तुम्हारे पिता कहाँ हैं, तुम्हारे दादा-परदादा कहाँ चले गए?॥ 38॥   |   mahabharat अध्याय 12.277: शरीर और संसारकी अनित्यता तथा आत्मकल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषके कर्तव्यका निर्देश—पिता-पुत्रका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.277.38 
किं ते धनैर्बान्धवैर्वापि किं ते
किं ते दारैर्ब्राह्मण यो मरिष्यसि।
आत्मानमन्विच्छ गुहां प्रविष्टं
पितामहास्ते क्व गता: पिता च॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माण्डदेव (पिता) ! जब एक दिन मरना ही है, तो यह सारा धन, वैभव, मित्र, सम्बन्धी, स्त्री-पुत्रादि सब किस काम के? अपने हृदय-गुहा में निवास करने वाली आत्मा की खोज करो। जरा सोचो, आज तुम्हारे पिता कहाँ हैं, तुम्हारे दादा-परदादा कहाँ चले गए?॥ 38॥
 
Brahmandev (father)! When you have to die one day, then what is the use of all this wealth, magnificence, friends, relatives, wife and children? Search for the soul residing in the cavity of your heart. Just think, where is your father today, where have your grandfather and grandfather gone?॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)