Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.277.37: ब्रह्म में एकता, समता, सत्य, नीतिनिष्ठा, दण्ड का त्याग (अहिंसा), सरलता और सब प्रकार के सकाम कर्मों का त्याग - इनके समान ब्राह्मण का दूसरा कोई धर्म नहीं है ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 12.277: शरीर और संसारकी अनित्यता तथा आत्मकल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषके कर्तव्यका निर्देश—पिता-पुत्रका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 277: शरीर और संसारकी अनित्यता तथा आत्मकल्याणकी इच्छा रखनेवाले पुरुषके कर्तव्यका निर्देश—पिता-पुत्रका संवाद  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.277.37 
नैतादृशं ब्राह्मणस्यास्ति वित्तं
यथैकता समता सत्यता च।
शीले स्थितिर्दण्डनिधानमार्जवं
ततस्ततश्चोपरम: क्रियाभ्य:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्म में एकता, समता, सत्य, नीतिनिष्ठा, दण्ड का त्याग (अहिंसा), सरलता और सब प्रकार के सकाम कर्मों का त्याग - इनके समान ब्राह्मण का दूसरा कोई धर्म नहीं है ॥37॥
 
Unity in Brahma, equality, truthfulness, loyalty to morality, renunciation of punishment (non-violence), simplicity and renunciation from all kinds of fruitive actions - there is no other religion of Brahmin like these. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)