Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.276.8: वस्तु चाहे कोई भी हो, जब व्यक्ति उसके प्रति आसक्ति विकसित कर लेता है और उसे अपना मान लेता है, तो जब वह नष्ट हो जाती है, तो वह दुख का कारण बन जाती है। | mahabharat अध्याय 12.276: तृष्णाके परित्यागके विषयमें माण्डव्य मुनि और जनकका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वस्तु चाहे कोई भी हो, जब व्यक्ति उसके प्रति आसक्ति विकसित कर लेता है और उसे अपना मान लेता है, तो जब वह नष्ट हो जाती है, तो वह दुख का कारण बन जाती है।
No matter what the object is, when one develops attachment towards it and accepts it as one's own, then when it gets destroyed it becomes the cause of suffering.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥