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सुसुखं बत जीवामि यस्य मे नास्ति किंचन।
मिथिलायां प्रदीप्तायां न मे दह्यति किंचन॥ ४॥
अनुवाद
राजा जनक ने कहा था, "मैं बहुत सुखी जीवन जी रहा हूँ क्योंकि इस संसार में कुछ भी मेरा नहीं है। मुझे किसी से कोई मोह नहीं है। चाहे पूरी मिथिला में आग लग जाए, मेरा कुछ भी नहीं जलेगा।"
King Janaka had said that I am living a very happy life because nothing in this world is mine. I have no attachment to anyone. Even if the entire Mithila catches fire, nothing of mine will burn.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥