Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.276.13: जो पुण्यात्मा पुरुष अपने सदाचार को चन्द्रमा के समान शुद्ध, उज्ज्वल और अपरिवर्तनशील देखता है, वह इस लोक और परलोक में यश और परम सुख प्राप्त करता है॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.276: तृष्णाके परित्यागके विषयमें माण्डव्य मुनि और जनकका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो पुण्यात्मा पुरुष अपने सदाचार को चन्द्रमा के समान शुद्ध, उज्ज्वल और अपरिवर्तनशील देखता है, वह इस लोक और परलोक में यश और परम सुख प्राप्त करता है॥13॥
The pious man who sees his good conduct as pure, bright and unchangeable as the moon, attains fame and supreme happiness in this world and the next. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥