श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.275.5 
तेभ्य: सृजति भूतानि काल आत्मप्रचोदित:।
एतेभ्यो य: परं ब्रूयादसद् ब्रूयादसंशयम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
काल परमात्मा की प्रेरणा से इन पाँच तत्वों के द्वारा सम्पूर्ण प्राणियों की रचना करता है। जो इनसे भिन्न किसी अन्य तत्व को प्राणियों के शरीरों का उपादान कारण कहता है, वह निःसंदेह मिथ्या बोलता है।
 
With the inspiration of God, Kaal creates all living beings through these five elements. The one who says any other element other than these as the material cause of the bodies of living beings, undoubtedly speaks a lie.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)