श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.275.31 
ऊष्मणा सह विंशो वा संघात: पाञ्चभौतिक:।
महान् संधारयत्येतच्छरीरं वायुना सह॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यदि हम उपर्युक्त तत्त्वों को जठराग्नि सहित गिन लें, तो यह पंचभौतिक योग बीस तत्त्वों का समूह है। महातत्त्व प्राणवायु सहित इस शरीर को धारण करता है। यह वायु शरीर में प्रवेश करने में एक प्रभावशाली साधन मात्र है। 31॥
 
If we count the above mentioned elements along with the gastrointestinal tract, this five physical combination is a group of twenty elements. Mahatattva sustains this body along with the vital air. This air is just a tool of effective importance in penetrating the body. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)