श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.275.3 
नारद उवाच
कुत: सृष्टमिदं विश्वं ब्रह्मन् स्थावरजङ्गमम्।
प्रलये च कमभ्येति तद् भवान् प्रब्रवीतु मे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
नारदजी ने पूछा, "हे ब्रह्मन्! यह सम्पूर्ण चर-अचर जगत किससे उत्पन्न हुआ है और प्रलयकाल में किसमें विलीन हो जाता है, कृपया मुझे बताइए?"
 
Narada asked, "O Brahman! From what is this whole animate and inanimate world created and into what does it merge at the time of destruction, please tell me?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)