श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.275.23 
इन्द्रियाणां स्वकर्मेभ्य: श्रमादुपरमो यदा।
भवतीन्द्रियसंत्यागादथ स्वपिति वै नर:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब इन्द्रियाँ अपने-अपने कर्मों से थककर शान्त हो जाती हैं, तब आत्मा इन्द्रियों को त्यागकर सो जाता है। 23.
 
When the senses become calm after being tired from their respective activities, then the soul abandons the senses and goes to sleep. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)