श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.275.19 
पाणिपादं च पायुश्च मेहनं पञ्चमं मुखम्।
इति संशब्द्यमानानि शृणु कर्मेन्द्रियाण्यपि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हाथ, पैर, गुदा, जननेन्द्रिय और पाँचवाँ मुख - ये सब कर्मेन्द्रियाँ कहलाती हैं। इनका भी वर्णन सुनो॥19॥
 
Hands, feet, anus, genitals and the fifth face - all of these are called organs of action. Listen to their description as well.॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)