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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद
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श्लोक 18
श्लोक
12.275.18
चित्तमिन्द्रियसंघातं मनो बुद्धिस्तथाष्टमी।
अष्टौ ज्ञानेन्द्रियाण्याहुरेतान्यध्यात्मचिन्तका:॥ १८॥
अनुवाद
जो लोग आध्यात्मिक विषयों का चिंतन करते हैं, वे पाँच इन्द्रियाँ, बुद्धि, मन और आठवीं बुद्धि को इन्द्रियाँ कहते हैं ॥18॥
Those who contemplate on spiritual matters call the five senses, the intellect, the mind and the eighth intellect as the sense organs. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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