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mahabharat 12.275.14: नेत्र, रूप, गंध, रस, स्पर्श और शब्द आदि पाँच इन्द्रियों के द्वारा - ये पाँच गुण दर्शन आदि पाँच प्रकार से प्राप्त होते हैं ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.275.14 
रूपं गन्धो रस: स्पर्श: शब्दश्चैवाथ तद्‍गुणा:।
इन्द्रियैरुपलभ्यन्ते पञ्चधा पञ्च पञ्चभि:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
नेत्र, रूप, गंध, रस, स्पर्श और शब्द आदि पाँच इन्द्रियों के द्वारा - ये पाँच गुण दर्शन आदि पाँच प्रकार से प्राप्त होते हैं ॥14॥
 
Through the five senses like eyes, form, smell, taste, touch and sound - these five qualities are attained in five ways like vision etc. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)