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mahabharat 12.275.11: प्राणियों का शरीर पृथ्वी से उत्पन्न है, श्रवणेन्द्रिय आकाश से उत्पन्न है, दृष्टिेन्द्रिय सूर्य से उत्पन्न है, प्राण वायु से उत्पन्न है और रक्त जल से उत्पन्न है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.275.11 
तस्य भूमिमयो देह: श्रोत्रमाकाशसम्भवम्।
सूर्याच्चक्षुरसुर्वायोरद्‍भ्यस्तु खलु शोणितम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
प्राणियों का शरीर पृथ्वी से उत्पन्न है, श्रवणेन्द्रिय आकाश से उत्पन्न है, दृष्टिेन्द्रिय सूर्य से उत्पन्न है, प्राण वायु से उत्पन्न है और रक्त जल से उत्पन्न है ॥11॥
 
The body of living beings is a product of the earth, the sense of hearing is created from the sky, the sense of sight is created from the sun, the soul is created from air and the blood is created from water. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)