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mahabharat 12.275.1: भीष्मजी कहते हैं-युधिष्ठिर! इस संबंध में प्राचीन इतिहास के विद्वान देवर्षि नारद और ब्रह्मर्षि असितदेवल के संवाद के रूप में उदाहरण देते हैं। 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 275: जीवात्माके देहाभिमानसे मुक्त होनेके विषयमें नारद और असितदेवलका संवाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.275.1 
भीष्म उवाच
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
नारदस्य च संवादं देवलस्यासितस्य च॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं-युधिष्ठिर! इस संबंध में प्राचीन इतिहास के विद्वान देवर्षि नारद और ब्रह्मर्षि असितदेवल के संवाद के रूप में उदाहरण देते हैं। 1॥
 
Bhishmaji says – Yudhishthir! In this regard, learned men from ancient history give examples in the form of dialogues between Devarshi Narad and Brahmarshi Asitdeval. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)