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अप्रमादाद् भयं रक्षेत् श्वासं क्षेत्रज्ञशीलनात्।
इच्छां द्वेषं च कामं च धैर्येण विनिवर्तयेत्॥ ६॥
अनुवाद
पापों से भय को दूर करो, प्राणों को आत्मा के विचारों से बचाओ अर्थात् प्राणायाम करो और धैर्य के द्वारा इच्छा, द्वेष और वासना से छुटकारा पाओ॥6॥
Remove the fear from the sins, protect the breath from the thoughts of the soul i.e. do pranayama and get rid of desire, hatred and lust through patience. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥