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mahabharat 12.274.3: घटक के निर्माण के समय जिस बुद्धि का उपयोग किया जाता है, घटक के जन्म के बाद उसकी आवश्यकता नहीं रहती, इसी प्रकार जब यज्ञ आदि धर्मों का लक्ष्य प्राप्त हो जाता है, जो मन को शुद्ध करने के साधन हैं, तब शम-दम आदि अन्य धर्मों के लिए उनकी आवश्यकता नहीं रहती, जो मोक्ष के साधन हैं॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.274: मोक्षके साधनका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 274: मोक्षके साधनका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.274.3 
करणे घटस्य या बुद्धिर्घटोत्पत्तौ न सा मता।
एवं धर्माभ्युपायेषु नान्यधर्मेषु कारणम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
घटक के निर्माण के समय जिस बुद्धि का उपयोग किया जाता है, घटक के जन्म के बाद उसकी आवश्यकता नहीं रहती, इसी प्रकार जब यज्ञ आदि धर्मों का लक्ष्य प्राप्त हो जाता है, जो मन को शुद्ध करने के साधन हैं, तब शम-दम आदि अन्य धर्मों के लिए उनकी आवश्यकता नहीं रहती, जो मोक्ष के साधन हैं॥3॥
 
The intellect which is used during the formation of Ghatak, is no longer necessary after the birth of Ghatak, similarly, when the goal of yagya and other religions which are means of purifying the mind is achieved, then they are no longer necessary for other religions like Sham-Dama etc. which are the means of salvation. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)