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mahabharat 12.274.13-14: काम, क्रोध, लोभ, भय और निद्रा - ये पाँच योग-सम्बन्धी दोष हैं, जिन्हें विद्वान पुरुष जानते हैं। इन्हें जड़ से उखाड़ देना चाहिए और इनका त्याग करके वाणी को वश में रखते हुए योगासनों का सेवन करना चाहिए। 13-14॥   |   mahabharat अध्याय 12.274: मोक्षके साधनका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 274: मोक्षके साधनका वर्णन  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  12.274.13-14 
योगदोषान् समुच्छिद्य पञ्च यान् कवयो विदु:॥ १३॥
कामं क्रोधं च लोभं च भयं स्वप्नं च पञ्चमम्।
परित्यज्य निषेवेत यतवाग् योगसाधनान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
काम, क्रोध, लोभ, भय और निद्रा - ये पाँच योग-सम्बन्धी दोष हैं, जिन्हें विद्वान पुरुष जानते हैं। इन्हें जड़ से उखाड़ देना चाहिए और इनका त्याग करके वाणी को वश में रखते हुए योगासनों का सेवन करना चाहिए। 13-14॥
 
Lust, anger, greed, fear and sleep – these are the five defects related to yoga, which are known by learned men. These should be uprooted and after abandoning them, one should consume yoga asanas while keeping one's speech under control. 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)