Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.274.10: विद्वान पुरुष वस्तुओं की अनित्यता का विचार करके अपनी ममता को, योगाभ्यास द्वारा अपनी भूख को, दया द्वारा अपने अहंकार को और संतोष द्वारा अपनी प्यास को जीत लेते हैं। 10॥ | mahabharat अध्याय 12.274: मोक्षके साधनका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनित्यत्वेन च स्नेहं क्षुधां योगेन पण्डित:।
कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषत:॥ १०॥
अनुवाद
विद्वान पुरुष वस्तुओं की अनित्यता का विचार करके अपनी ममता को, योगाभ्यास द्वारा अपनी भूख को, दया द्वारा अपने अहंकार को और संतोष द्वारा अपनी प्यास को जीत लेते हैं। 10॥
Learned men conquer their affection by thinking about the impermanence of things, their hunger by practicing yoga, their pride by compassion and their thirst by satisfaction. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥