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mahabharat 12.273.5: इससे उसके मन में उन वस्तुओं के प्रति आसक्ति उत्पन्न होती है। तत्पश्चात् प्रतिकूल वस्तुओं के प्रति द्वेष उत्पन्न होता है। तत्पश्चात् अनुकूल वस्तुओं के प्रति लोभ उत्पन्न होता है और लोभ के बाद आसक्ति उसके मन पर हावी हो जाती है ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.273: धर्म, अधर्म, वैराग्य और मोक्षके विषयमें युधिष्ठिरके चार प्रश्न और उनका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 273: धर्म, अधर्म, वैराग्य और मोक्षके विषयमें युधिष्ठिरके चार प्रश्न और उनका उत्तर  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.273.5 
ततो राग: प्रभवति द्वेषश्च तदनन्तरम्।
ततो लोभ: प्रभवति मोहश्च तदनन्तरम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इससे उसके मन में उन वस्तुओं के प्रति आसक्ति उत्पन्न होती है। तत्पश्चात् प्रतिकूल वस्तुओं के प्रति द्वेष उत्पन्न होता है। तत्पश्चात् अनुकूल वस्तुओं के प्रति लोभ उत्पन्न होता है और लोभ के बाद आसक्ति उसके मन पर हावी हो जाती है ॥5॥
 
Due to this, attachment for those objects develops in his mind. Thereafter, he develops hatred for the unfavorable objects. Then he develops greed for the favorable objects and after greed, attachment takes over his mind. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)