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mahabharat 12.273.24: अतः कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर! तुम्हें सभी अवस्थाओं में धर्म का आचरण करना चाहिए; क्योंकि जो लोग धर्म में स्थित रहते हैं, वे सनातन मोक्षरूप परम सिद्धि को प्राप्त होते हैं॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.273: धर्म, अधर्म, वैराग्य और मोक्षके विषयमें युधिष्ठिरके चार प्रश्न और उनका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 273: धर्म, अधर्म, वैराग्य और मोक्षके विषयमें युधिष्ठिरके चार प्रश्न और उनका उत्तर  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.273.24 
तस्माद् धर्मे प्रवर्तेथा: सर्वावस्थं युधिष्ठिर।
धर्मे स्थितानां कौन्तेय सिद्धिर्भवति शाश्वती॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अतः कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर! तुम्हें सभी अवस्थाओं में धर्म का आचरण करना चाहिए; क्योंकि जो लोग धर्म में स्थित रहते हैं, वे सनातन मोक्षरूप परम सिद्धि को प्राप्त होते हैं॥24॥
 
So Kuntinandan Yudhishthir! You should practice Dharma in all situations; Because those who remain established in religion, attain the supreme accomplishment in the form of eternal salvation. 24॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि चतु:प्राश्निको नाम त्रिसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें चार प्रश्न और उनका उत्तर नामक दो सौ तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)