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युधिष्ठिर उवाच
कथं भवति पापात्मा कथं धर्मं करोति वा।
केन निर्वेदमादत्ते मोक्षं वा केन गच्छति॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! मनुष्य पापी कैसे बनता है? वह धर्म के मार्ग पर कैसे चलता है? वह किस उपाय से वैराग्य प्राप्त करता है और किस उपाय से मोक्ष प्राप्त करता है?"
Yudhishthira asked, "Grandfather! How does a man become a sinner? How does he follow the path of dharma? By what means does he attain detachment and by what means does he attain salvation?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥