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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 272: यज्ञमें हिंसाकी निन्दा और अहिंसाकी प्रशंसा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.272.9 
तस्मिन् वने समीपस्थो मृगोऽभूत् सहवासिक:।
वचोभिरब्रवीत् सत्यं त्वयेदं दुष्कृतं कृतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस वन में सत्य का साथी एक हिरण था जो पास ही रहता था। एक दिन उसने मानव स्वर में सत्य से कहा - 'ब्राह्मण! तुमने यज्ञ के नाम पर यह पाप किया है।
 
Satya's companion in that forest was a deer who lived nearby. One day he said to Satya in human voice - 'Brahmin! You have committed this evil deed in the name of Yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)