अहिंसा ही पूर्ण धर्म है। हिंसा अधर्म है और अधर्म हानिकारक है। अब मैं तुम्हें सत्य का महत्त्व बताता हूँ, जो सत्यनिष्ठ पुरुषों का परम धर्म है।
Non-violence is the complete religion. Violence is adharma and adharma is harmful. Now I will tell you the importance of truth, which is the ultimate religion of truthful men.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि यज्ञनिन्दानाम द्विसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें हिंसात्मक यज्ञकी निन्दा नामक दो सौ बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)