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mahabharat 12.272.2: भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! मैं तुम्हें एक ऐसे ब्राह्मण की कथा सुना रहा हूँ जो पूर्वकाल में कुलीन जीवन व्यतीत करता था और जिसने यज्ञ किया था। नारद जी ने मुझे इसके बारे में बताया था।   |   mahabharat अध्याय 12.272: यज्ञमें हिंसाकी निन्दा और अहिंसाकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 272: यज्ञमें हिंसाकी निन्दा और अहिंसाकी प्रशंसा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.272.2 
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तयिष्यामि नारदेनानुकीर्तितम्।
उञ्छवृत्ते: पुरावृत्तं यज्ञार्थे ब्राह्मणस्य च॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! मैं तुम्हें एक ऐसे ब्राह्मण की कथा सुना रहा हूँ जो पूर्वकाल में कुलीन जीवन व्यतीत करता था और जिसने यज्ञ किया था। नारद जी ने मुझे इसके बारे में बताया था।
 
Bhishma said, "Yudhishthira! I am telling you the story of a Brahmin who lived a noble life in the past and who performed a sacrifice. Narada had told me about it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)