Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.272.19: तत्पश्चात् भगवान धर्म ने स्वयं सत्य का यज्ञ किया। तब सत्य ने तप किया और अपनी पत्नी पुष्करधारिणी की मनःस्थिति के अनुसार उत्तम उपाय प्राप्त किया (उन्हें दृढ़ विश्वास हो गया कि हिंसा से महान हानि होती है, अहिंसा ही परम कल्याण का एकमात्र साधन है)।॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.272: यज्ञमें हिंसाकी निन्दा और अहिंसाकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततस्तं भगवान् धर्मो यज्ञं याजयत: स्वयम्।
समाधानं च भार्याया लेभे स तपसा परम्॥ १९॥
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान धर्म ने स्वयं सत्य का यज्ञ किया। तब सत्य ने तप किया और अपनी पत्नी पुष्करधारिणी की मनःस्थिति के अनुसार उत्तम उपाय प्राप्त किया (उन्हें दृढ़ विश्वास हो गया कि हिंसा से महान हानि होती है, अहिंसा ही परम कल्याण का एकमात्र साधन है)।॥19॥
Thereafter, Lord Dharma himself performed the yagya of Satya. Then Satya performed penance and got the best solution as per the state of mind of his wife Pushkardharini (he became firmly convinced that violence causes great harm, non-violence is the only means of ultimate welfare).॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥