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mahabharat 12.272.13: सत्या सावित्री देवी के सामने हाथ जोड़े खड़ा था। तभी हिरण ने फिर से अपनी बलि देने का अनुरोध किया। सत्या ने हिरण को गले लगा लिया और प्रेमपूर्वक कहा, "यहाँ से चले जाओ।"   |   mahabharat अध्याय 12.272: यज्ञमें हिंसाकी निन्दा और अहिंसाकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 272: यज्ञमें हिंसाकी निन्दा और अहिंसाकी प्रशंसा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.272.13 
स तु बद्धाञ्जलिं सत्यमयाचद्धरिण: पुन:।
सत्येन स परिष्वज्य संदिष्टो गम्यतामिति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सत्या सावित्री देवी के सामने हाथ जोड़े खड़ा था। तभी हिरण ने फिर से अपनी बलि देने का अनुरोध किया। सत्या ने हिरण को गले लगा लिया और प्रेमपूर्वक कहा, "यहाँ से चले जाओ।"
 
Satya was standing with folded hands facing Savitri Devi. At this moment the deer again requested to sacrifice itself. Satya embraced the deer and said lovingly, 'Go away from here'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)