Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.272.11: तदनन्तर सावित्री उस यज्ञ में स्वयं प्रकट हुईं और उन्होंने उस ब्राह्मण को एक मृग की बलि देने की सलाह दी। ब्राह्मण ने सावित्री की आज्ञा मानने से यह कहकर इनकार कर दिया कि वह अपने साथी मृग को नहीं मार सकता। 11॥ | mahabharat अध्याय 12.272: यज्ञमें हिंसाकी निन्दा और अहिंसाकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदनन्तर सावित्री उस यज्ञ में स्वयं प्रकट हुईं और उन्होंने उस ब्राह्मण को एक मृग की बलि देने की सलाह दी। ब्राह्मण ने सावित्री की आज्ञा मानने से यह कहकर इनकार कर दिया कि वह अपने साथी मृग को नहीं मार सकता। 11॥
Subsequently, Savitri personally appeared in that Yagya and advised that Brahmin to sacrifice a deer. The Brahmin refused to obey Savitri's orders, saying that he could not kill his fellow deer. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥