Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.272.10: यदि किया हुआ यज्ञ मन्त्रों और अंगों से रहित हो, तो वह यजमान के लिए पाप कर्म है। हे ब्राह्मण! तुम मुझे होता को सौंप दो और निष्कलंक स्वर्ग जाओ।॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.272: यज्ञमें हिंसाकी निन्दा और अहिंसाकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि किया हुआ यज्ञ मन्त्रों और अंगों से रहित हो, तो वह यजमान के लिए पाप कर्म है। हे ब्राह्मण! तुम मुझे होता को सौंप दो और निष्कलंक स्वर्ग जाओ।॥10॥
‘If the yajna performed is devoid of mantras and angas, then it is a bad deed for the yajaman. O Brahmin! You hand me over to Hota and go to heaven without any blame.’॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥