Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.272.1: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! यज्ञ और तप तो बहुत हैं और वे सब भगवान की प्रीति के लिए ही किए जा सकते हैं; परंतु उनमें से वह यज्ञ किस प्रकार किया जाता है जिसका उद्देश्य केवल धर्म ही हो और जिससे स्वर्गिक सुख या धन की प्राप्ति न हो?॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.272: यज्ञमें हिंसाकी निन्दा और अहिंसाकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
बहूनां यज्ञतपसामेकार्थानां पितामह।
धर्मार्थं न सुखार्थार्थं कथं यज्ञ: समाहित:॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! यज्ञ और तप तो बहुत हैं और वे सब भगवान की प्रीति के लिए ही किए जा सकते हैं; परंतु उनमें से वह यज्ञ किस प्रकार किया जाता है जिसका उद्देश्य केवल धर्म ही हो और जिससे स्वर्गिक सुख या धन की प्राप्ति न हो?॥1॥
Yudhishthir asked – Grandfather! There are many sacrifices and penances and all of them can be done only for the love of God; But among them, how is the Yagya performed whose purpose is only for religion and does not lead to heavenly happiness or wealth? 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥