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mahabharat 12.271.9: फिर ब्राह्मण ने धूप, इत्र, छोटी-बड़ी मालाएं तथा नाना प्रकार के नैवेद्य अर्पित करके कुण्डधार मेघ की पूजा की।   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.271.9 
ततो धूपैश्च गन्धैश्च माल्यैरुच्चावचैरपि।
बलिभिर्विविधाभिश्च पूजयामास तं द्विज:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
फिर ब्राह्मण ने धूप, इत्र, छोटी-बड़ी मालाएं तथा नाना प्रकार के नैवेद्य अर्पित करके कुण्डधार मेघ की पूजा की।
 
Then the Brahmin worshipped the Kundadhar cloud by offering incense, perfume, small and big garlands and various kinds of offerings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)