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mahabharat 12.271.56: हे राजन! देवता आप पर बहुत प्रसन्न हैं, जिससे आपकी बुद्धि धर्म में लगी हुई है। धन में सुख का अंश मात्र है। परम सुख तो धर्म में है। ॥56॥   |   mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.271.56 
सुप्रसन्ना हि ते देवा यत्ते धर्मे रता मति:।
धने सुखकला काचिद् धर्मे तु परमं सुखम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! देवता आप पर बहुत प्रसन्न हैं, जिससे आपकी बुद्धि धर्म में लगी हुई है। धन में सुख का अंश मात्र है। परम सुख तो धर्म में है। ॥56॥
 
O King! The gods are very pleased with you, because of which your intellect is focused on religion. There is only a trace of happiness in wealth. The ultimate happiness is in religion. ॥ 56॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि कुण्डधारोपाख्याने एकसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २७१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें कुण्डधारका उपाख्यानविषयक दो सौ इकहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)