Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.271.55: देवता, ब्राह्मण, मुनि, मुनि, यक्ष, मनुष्य और भाट - ये सभी इस संसार में पुण्यात्माओं को ही पूजते हैं, धनवानों और भोगियों को नहीं ॥55॥ | mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवता ब्राह्मणा: सन्तो यक्षा मानुषचारणा:।
धार्मिकान् पूजयन्तीह न धनाढॺान् न कामिन:॥ ५५॥
अनुवाद
देवता, ब्राह्मण, मुनि, मुनि, यक्ष, मनुष्य और भाट - ये सभी इस संसार में पुण्यात्माओं को ही पूजते हैं, धनवानों और भोगियों को नहीं ॥55॥
Gods, Brahmins, saints, sages, Yakshas, humans and bards - all of them worship the virtuous in this world, not the rich and the pleasure-seekers. ॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥