Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.271.52: (कुण्डधार ने कहा -) ‘वस्तु! मैंने तुम्हें पहले ही क्षमा कर दिया है।’ ऐसा कहकर मेघ ने अपनी दोनों भुजाओं से उस श्रेष्ठ ब्राह्मण को गले लगा लिया और फिर वहीं से अंतर्धान हो गया ॥52॥ | mahabharat अध्याय 12.271: धन और काम-भोगोंकी अपेक्षा धर्म और तपस्याका उत्कर्ष सूचित करनेवाली ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(कुण्डधार ने कहा -) ‘वस्तु! मैंने तुम्हें पहले ही क्षमा कर दिया है।’ ऐसा कहकर मेघ ने अपनी दोनों भुजाओं से उस श्रेष्ठ ब्राह्मण को गले लगा लिया और फिर वहीं से अंतर्धान हो गया ॥52॥
(Kundadhar said -) 'Vaastu! I have already forgiven you.' Saying so, the cloud embraced the great Brahmin with both his arms and then disappeared from there itself. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥